कर्म योग (Karma Yoga) – श्लोक 31

श्लोक ३१ में कहा गया है कि श्रद्धा से इस मत का पालन करने वाले कर्मबन्धन से मुक्त होते हैं। Verse 31: Those who follow this teaching with faith are freed from bondage.

संस्कृत श्लोक

ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः | श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ||३१||

ye me matam idaṃ nityam anutiṣṭhanti mānavāḥ | śraddhāvanto'nasūyanto mucyante te'pi karmabhiḥ ||31||

पदच्छेद / शब्दार्थ

ये: जो; मे: मेरे; मतम्: मत (उपदेश) को; इदम्: इस; नित्यम्: नित्य; अनुतिष्ठन्ति: आचरण करते हैं; मानवा: मनुष्य; श्रद्धावन्त: श्रद्धा युक्त; अनसूयन्त: दोषदृष्टि न करने वाले; मुच्यन्ते: मुक्त हो जाते हैं; ते: वे; अपि: भी; कर्मभि: कर्मों से।

हिंदी अनुवाद

जो मनुष्य इस मेरे मत (उपदेश) का श्रद्धापूर्वक और बिना दोषदृष्टि के नित्य पालन करते हैं, वे भी कर्मों के बन्धन से मुक्त हो जाते हैं।

English Translation

Those who follow this teaching of Mine with faith and without envy – they also become free from the bondage of actions.

टीका / Commentary

भगवान अब वचन देते हैं कि जो भी इस उपदेश को श्रद्धा से मानेगा, वह कर्मबन्धन से मुक्त होगा। यह मार्ग सभी के लिए खुला है। The Lord now promises that whoever follows this teaching with faith will be freed from bondage. This path is open to all.