कर्म योग (Karma Yoga) – श्लोक 30
श्लोक ३० में भगवान कहते हैं – मुझमें कर्म समर्पित कर, निर्मम होकर युद्ध कर। Verse 30: Renounce all actions unto Me, and fight, free from desire and ego.
संस्कृत श्लोक
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा | निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ||३०||
mayi sarvāṇi karmāṇi sannyasyādhyātmacetasā | nirāśīr nirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ ||30||
पदच्छेद / शब्दार्थ
मयि: मुझमें; सर्वाणि: सब; कर्माणि: कर्मों को; संन्यस्य: समर्पित करके; अध्यात्मचेतसा: अध्यात्म-बुद्धि से; निराशी: आशा (फल की इच्छा) रहित; निर्मम: ममता रहित; भूत्वा: होकर; युध्यस्व: युद्ध कर; विगतज्वर: ज्वर (शोक) रहित।
हिंदी अनुवाद
मुझमें सब कर्मों का समर्पण करके, अध्यात्म-बुद्धि से युक्त हो, आशा-आकांक्षा रहित, ममता रहित और शोकरहित होकर युद्ध कर।
English Translation
Renouncing all actions unto Me, with your mind fixed on the Self, free from desire and ego, and freed from mental fever – fight!
टीका / Commentary
यह अर्जुन के लिए प्रत्यक्ष आदेश है – सब कर्म कृष्ण को समर्पित करो, निराशी और निर्मम होकर युद्ध करो। यही कर्मयोग की चरम सीख है। This is the direct command to Arjuna – surrender all actions to Krishna, be free from desire and possessiveness, and fight. This is the ultimate teaching of Karma Yoga.