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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 · श्लोक 19

अध्याय 3 · श्लोक 19

कर्म योग (Karma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर | असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ||१९||

tasmād asaktaḥ satataṃ kāryaṃ karma samācara | asakto hy ācaran karma param āpnoti pūruṣaḥ ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्मात्: इसलिए; असक्तः: आसक्ति रहित; सततम्: निरन्तर; कार्यम्: कर्तव्य; कर्म: कर्म; समाचर: अच्छी तरह से कर; असक्त: आसक्ति रहित; हि: निश्चय ही; आचरन्: करता हुआ; कर्म: कर्म; परम्: परम (गति); आप्नोति: प्राप्त करता है; पूरुष: मनुष्य।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इसलिए आसक्ति रहित होकर निरन्तर कर्तव्य-कर्म को अच्छी तरह से कर। क्योंकि आसक्ति रहित होकर कर्म करने वाला मनुष्य परम गति को प्राप्त होता है।

English Translation

Therefore, without attachment, always perform the work that has to be done. For by working without attachment, a man attains the Supreme.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह कर्मयोग का सार है – आसक्ति रहित होकर कर्तव्य करो। यही परम पद की प्राप्ति का मार्ग है। This is the essence of Karma Yoga – perform your duty without attachment. This is the path to the Supreme.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।