कर्म योग (Karma Yoga) – श्लोक 19

श्लोक १९ में कहा गया है कि आसक्ति रहित कर्तव्य-कर्म करने से परम गति मिलती है। Verse 19: Performing duty without attachment leads to the Supreme.

संस्कृत श्लोक

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर | असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः ||१९||

tasmād asaktaḥ satataṃ kāryaṃ karma samācara | asakto hy ācaran karma param āpnoti pūruṣaḥ ||19||

पदच्छेद / शब्दार्थ

तस्मात्: इसलिए; असक्तः: आसक्ति रहित; सततम्: निरन्तर; कार्यम्: कर्तव्य; कर्म: कर्म; समाचर: अच्छी तरह से कर; असक्त: आसक्ति रहित; हि: निश्चय ही; आचरन्: करता हुआ; कर्म: कर्म; परम्: परम (गति); आप्नोति: प्राप्त करता है; पूरुष: मनुष्य।

हिंदी अनुवाद

इसलिए आसक्ति रहित होकर निरन्तर कर्तव्य-कर्म को अच्छी तरह से कर। क्योंकि आसक्ति रहित होकर कर्म करने वाला मनुष्य परम गति को प्राप्त होता है।

English Translation

Therefore, without attachment, always perform the work that has to be done. For by working without attachment, a man attains the Supreme.

टीका / Commentary

यह कर्मयोग का सार है – आसक्ति रहित होकर कर्तव्य करो। यही परम पद की प्राप्ति का मार्ग है। This is the essence of Karma Yoga – perform your duty without attachment. This is the path to the Supreme.