आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 · श्लोक 14

अध्याय 3 · श्लोक 14

कर्म योग (Karma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः | यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ||१४||

annād bhavanti bhūtāni parjanyād anna sambhavaḥ | yajñād bhavati parjanyo yajñaḥ karma samudbhavaḥ ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अन्नात्: अन्न से; भवन्ति: उत्पन्न होते हैं; भूतानि: प्राणी; पर्जन्यात्: वर्षा से; अन्नसम्भव: अन्न की उत्पत्ति; यज्ञात्: यज्ञ से; भवति: होती है; पर्जन्य: वर्षा; यज्ञ: यज्ञ; कर्मसमुद्भव: कर्म से उत्पन्न।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अन्न से प्राणी उत्पन्न होते हैं; वर्षा से अन्न की उत्पत्ति होती है; यज्ञ से वर्षा होती है; और यज्ञ कर्म से उत्पन्न होता है।

English Translation

All living beings subsist on food; food is produced by rain; rain comes from sacrifice; sacrifice is born of prescribed duties (karma).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान यहाँ एक पारिस्थितिक और आध्यात्मिक चक्र बताते हैं – अंततः सब कर्म पर निर्भर है। यज्ञ (सकाम कर्म) से वर्षा, वर्षा से अन्न, अन्न से प्राणी। इसलिए कर्म अपरिहार्य है। The Lord here describes an ecological and spiritual cycle – ultimately everything depends on action. Sacrifice brings rain, rain brings food, food sustains beings. Thus action is inevitable.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।