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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 · श्लोक 10

अध्याय 3 · श्लोक 10

कर्म योग (Karma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः | अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक् ||१०||

sahayajñāḥ prajāḥ sṛṣṭvā purovāca prajāpatiḥ | anena prasaviṣyadhvam eṣa vo'stv iṣṭakāmadhuk ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सहयज्ञाः: यज्ञ के साथ; प्रजाः: प्रजाओं को; सृष्ट्वा: सृष्टि करके; पुरा: पूर्व काल में; उवाच: बोला; प्रजापतिः: प्रजापति (ब्रह्मा); अनेन: इस (यज्ञ) से; प्रसविष्यध्वम्: बढ़ो-फूलो; एष: यह; व: तुम्हारे लिए; अस्तु: हो; इष्टकामधुक्: इच्छित कामनाओं को पूर्ण करने वाला।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

प्रजापति (ब्रह्मा) ने युगों के आदि में यज्ञ के साथ प्रजाओं को उत्पन्न करके कहा – इस (यज्ञ) से तुम लोग समृद्ध होओ और यह (यज्ञ) तुम्हारी समस्त इच्छित कामनाओं को पूर्ण करने वाला हो।

English Translation

In the beginning, the Creator (Prajapati) created mankind along with yajña (sacrifice) and said: By this shall you prosper. Let this be the cow of plenty (kāmadhenu) that grants all your desires.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान अब वैदिक सृष्टि-कथा का उल्लेख करते हैं कि ब्रह्मा ने मनुष्यों को यज्ञ के साथ बनाया और उन्हें यज्ञ द्वारा समृद्ध होने का आदेश दिया। यज्ञ ही कामधेनु है जो इच्छाएँ पूरी करता है। The Lord now refers to the Vedic creation story: Brahmā created humans along with yajña and instructed them to prosper through it. Yajña itself is the wish-fulfilling cow.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।