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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 9

अध्याय 2 · श्लोक 9

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप | न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ||९||

evam uktvā hṛṣīkeśaṃ guḍākeśaḥ parantapa | na yotsya iti govindam uktvā tūṣṇīṃ babhūva ha ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एवम्: इस प्रकार; उक्त्वा: कहकर; हृषीकेशम्: हृषीकेश (कृष्ण) से; गुडाकेशः: गुडाकेश (अर्जुन); परन्तप: हे शत्रुतापन; न: नहीं; योत्स्ये: युद्ध करूँगा; इति: इस प्रकार; गोविन्दम्: गोविन्द (कृष्ण) से; उक्त्वा: कहकर; तूष्णीम्: मौन; बभूव: हो गया; ह: निश्चय ही।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे परन्तप! (संजय कहते हैं) इस प्रकार हृषीकेश (कृष्ण) से कहकर और गोविन्द से "मैं युद्ध नहीं करूँगा" कहकर गुडाकेश (अर्जुन) मौन हो गए।

English Translation

Having spoken thus to Hrishikesha, Gudakesha (Arjuna), the scorcher of foes, said to Govinda, "I will not fight," and became silent.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन ने अपनी बात कह दी, अब वे मौन हो गए हैं। "गुडाकेश" का अर्थ है निद्रा पर विजय पाने वाला, लेकिन यहाँ वे मोह से ग्रस्त हैं। कृष्ण अब उपदेश देने के लिए तैयार हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।