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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 10

अध्याय 2 · श्लोक 10

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ||१०||

tam uvāca hṛṣīkeśaḥ prahasann iva bhārata | senayor ubhayor madhye viṣīdantam idaṃ vacaḥ ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तम्: उससे; उवाच: बोले; हृषीकेशः: हृषीकेश; प्रहसन्: हँसते हुए; इव: जैसे; भारत: हे भरतवंशी (धृतराष्ट्र); सेनयोः: दोनों सेनाओं के; उभयोः: दोनों; मध्ये: मध्य में; विषीदन्तम्: शोक करते हुए; इदम्: यह; वचः: वचन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत! तब दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए अर्जुन से हृषीकेश (कृष्ण) ने हँसते हुए से ये वचन कहे।

English Translation

O Bharata (Dhritarashtra), then Hrishikesha (Krishna), as if smiling, spoke these words to him (Arjuna) who was grieving in the midst of the two armies.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण का मुस्कुराना यह दर्शाता है कि वे अर्जुन के मोह को व्यर्थ समझते हैं, और अब ज्ञान देने की कृपा करेंगे। यह मुस्कान करुणा और गम्भीरता दोनों से युक्त है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।