सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 10

श्लोक १० में कृष्ण दोनों सेनाओं के बीच खड़े होकर अर्जुन को उपदेश देने लगते हैं।

संस्कृत श्लोक

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ||१०||

tam uvāca hṛṣīkeśaḥ prahasann iva bhārata | senayor ubhayor madhye viṣīdantam idaṃ vacaḥ ||10||

पदच्छेद / शब्दार्थ

तम्: उससे; उवाच: बोले; हृषीकेशः: हृषीकेश; प्रहसन्: हँसते हुए; इव: जैसे; भारत: हे भरतवंशी (धृतराष्ट्र); सेनयोः: दोनों सेनाओं के; उभयोः: दोनों; मध्ये: मध्य में; विषीदन्तम्: शोक करते हुए; इदम्: यह; वचः: वचन।

हिंदी अनुवाद

हे भारत! तब दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए अर्जुन से हृषीकेश (कृष्ण) ने हँसते हुए से ये वचन कहे।

English Translation

O Bharata (Dhritarashtra), then Hrishikesha (Krishna), as if smiling, spoke these words to him (Arjuna) who was grieving in the midst of the two armies.

टीका / Commentary

कृष्ण का मुस्कुराना यह दर्शाता है कि वे अर्जुन के मोह को व्यर्थ समझते हैं, और अब ज्ञान देने की कृपा करेंगे। यह मुस्कान करुणा और गम्भीरता दोनों से युक्त है।