सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 11
श्लोक ११ में कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि वे जिनके लिए शोक कर रहे हैं, वे वस्तुतः शोक के योग्य नहीं हैं, क्योंकि आत्मा अमर है।
संस्कृत श्लोक
श्रीभगवानुवाच | अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे | गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ||११||
śrī-bhagavān uvāca | aśocyān anvaśocas tvaṃ prajñā-vādāṃś ca bhāṣase | gatāsūn agatāsūṃś ca nānuśocanti paṇḍitāḥ ||11||
पदच्छेद / शब्दार्थ
श्रीभगवान्: भगवान; उवाच: बोले; अशोच्यान्: जिनका शोक नहीं करना चाहिए; अन्वशोचः: शोक करते हो; त्वम्: तुम; प्रज्ञावादान्: प्रज्ञा के वचन; च: और; भाषसे: बोलते हो; गतासून्: मृत शरीरों के लिए; अगतासून्: जीवितों के लिए; च: और; न: नहीं; अनुशोचन्ति: शोक करते; पण्डिताः: विद्वान।
हिंदी अनुवाद
श्रीभगवान् बोले: तू उनके लिए शोक करता है जिनके लिए शोक नहीं करना चाहिए, और प्रज्ञा (बुद्धि) की बातें भी करता है। ज्ञानी लोग जीवितों के लिए और मरे हुओं के लिए भी शोक नहीं करते।
English Translation
The Supreme Lord said: You grieve for those who should not be grieved for, yet you speak words of wisdom. The wise grieve neither for the living nor for the dead.
टीका / Commentary
कृष्ण अर्जुन की बातों में विरोधाभास बताते हैं – वे प्रज्ञा की बातें तो करते हैं, परन्तु शोक उन विषयों के लिए कर रहे हैं जो शोक के योग्य नहीं हैं। आत्मा की अमरता को समझने वाला न तो जीवित के लिए शोक करता है, न मृत के लिए।