आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 12

अध्याय 2 · श्लोक 12

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः | न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् ||१२||

na tv evāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ | na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayam ataḥ param ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: नहीं; तु: लेकिन; एव: निश्चय ही; अहम्: मैं; जातु: कभी; न: नहीं; आसम्: था; न: नहीं; त्वम्: तुम; न: नहीं; इमे: ये; जनाधिपाः: राजा; न: नहीं; च: और; एव: निश्चय ही; न: नहीं; भविष्यामः: होंगे; सर्वे: सभी; वयम्: हम; अतः: इसके बाद; परम्: आगे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

ऐसा कभी नहीं था कि मैं नहीं था, या तुम नहीं थे, या ये राजा नहीं थे; और ऐसा नहीं है कि आगे से हम सब नहीं रहेंगे।

English Translation

Never was there a time when I did not exist, nor you, nor these rulers of men. Nor will there ever be a time when we shall all cease to exist.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण स्पष्ट करते हैं कि आत्मा की सत्ता तीनों कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) में निरन्तर बनी रहती है। मैं (कृष्ण), तुम (अर्जुन), और ये सभी राजा – सब आत्माएँ शाश्वत हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।