सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 71
श्लोक ७१ में शान्ति प्राप्ति के उपाय बताए गए हैं – काम, ममता और अहंकार का त्याग।
संस्कृत श्लोक
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः | निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||७१||
vihāya kāmān yaḥ sarvān pumāṃś carati niḥspṛhaḥ | nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntim adhigacchati ||71||
पदच्छेद / शब्दार्थ
विहाय: त्यागकर; कामान्: कामनाओं को; यः: जो; सर्वान्: सब; पुमान्: पुरुष; चरति: आचरण करता है; निःस्पृहः: निःस्पृह (इच्छारहित); निर्ममः: ममतारहित; निरहङ्कारः: अहंकाररहित; सः: वह; शान्तिम्: शान्ति; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।
हिंदी अनुवाद
जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर निःस्पृह (इच्छारहित), निर्मम (ममतारहित) और निरहङ्कार (अहंकाररहित) होकर आचरण करता है, वह शान्ति को प्राप्त होता है।
English Translation
That person who abandons all desires and acts free from craving, without any sense of mineness or egoism, attains peace.
टीका / Commentary
शान्ति का मार्ग – सभी कामनाओं का त्याग, ममता और अहंकार से मुक्त होकर जीना।