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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 71

अध्याय 2 · श्लोक 71

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः | निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ||७१||

vihāya kāmān yaḥ sarvān pumāṃś carati niḥspṛhaḥ | nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntim adhigacchati ||71||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

विहाय: त्यागकर; कामान्: कामनाओं को; यः: जो; सर्वान्: सब; पुमान्: पुरुष; चरति: आचरण करता है; निःस्पृहः: निःस्पृह (इच्छारहित); निर्ममः: ममतारहित; निरहङ्कारः: अहंकाररहित; सः: वह; शान्तिम्: शान्ति; अधिगच्छति: प्राप्त होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो पुरुष सब कामनाओं को त्यागकर निःस्पृह (इच्छारहित), निर्मम (ममतारहित) और निरहङ्कार (अहंकाररहित) होकर आचरण करता है, वह शान्ति को प्राप्त होता है।

English Translation

That person who abandons all desires and acts free from craving, without any sense of mineness or egoism, attains peace.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

शान्ति का मार्ग – सभी कामनाओं का त्याग, ममता और अहंकार से मुक्त होकर जीना।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।