सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 72

श्लोक ७२ में अध्याय का निष्कर्ष – यह ब्राह्मी स्थिति है, जिसे पाकर व्यक्ति मोक्ष पाता है।

संस्कृत श्लोक

एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति | स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ||७२||

eṣā brāhmī sthitiḥ pārtha naināṃ prāpya vimuhyati | sthitvāsyām anta-kāle 'pi brahma-nirvāṇam ṛcchati ||72||

पदच्छेद / शब्दार्थ

एषा: यह; ब्राह्मी: ब्रह्म-सम्बन्धिनी; स्थितिः: स्थिति; पार्थ: हे पार्थ; न: नहीं; एनाम्: इसको; प्राप्य: प्राप्त करके; विमुह्यति: मोहित होता; स्थित्वा: स्थित होकर; अस्याम्: इसमें; अन्तकाले: अन्तकाल में; अपि: भी; ब्रह्मनिर्वाणम्: ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष); ऋच्छति: प्राप्त होता है।

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! यह ब्राह्मी स्थिति (ब्रह्म में स्थिति) है। इसे प्राप्त करके मनुष्य मोहित नहीं होता। इस स्थिति में स्थित होकर अन्तकाल में भी वह ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हो जाता है।

English Translation

O Partha, this is the state of being established in Brahman. One does not become deluded after attaining this. Being established in this state even at the end of life, one attains oneness with Brahman.

टीका / Commentary

गीता अध्याय २ का समापन – यह स्थितप्रज्ञ की ब्राह्मी स्थिति है। इसे प्राप्त कर व्यक्ति मोह से मुक्त हो जाता है और अन्त में मोक्ष पाता है।