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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 72

अध्याय 2 · श्लोक 72

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति | स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ||७२||

eṣā brāhmī sthitiḥ pārtha naināṃ prāpya vimuhyati | sthitvāsyām anta-kāle 'pi brahma-nirvāṇam ṛcchati ||72||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एषा: यह; ब्राह्मी: ब्रह्म-सम्बन्धिनी; स्थितिः: स्थिति; पार्थ: हे पार्थ; न: नहीं; एनाम्: इसको; प्राप्य: प्राप्त करके; विमुह्यति: मोहित होता; स्थित्वा: स्थित होकर; अस्याम्: इसमें; अन्तकाले: अन्तकाल में; अपि: भी; ब्रह्मनिर्वाणम्: ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष); ऋच्छति: प्राप्त होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! यह ब्राह्मी स्थिति (ब्रह्म में स्थिति) है। इसे प्राप्त करके मनुष्य मोहित नहीं होता। इस स्थिति में स्थित होकर अन्तकाल में भी वह ब्रह्म-निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त हो जाता है।

English Translation

O Partha, this is the state of being established in Brahman. One does not become deluded after attaining this. Being established in this state even at the end of life, one attains oneness with Brahman.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

गीता अध्याय २ का समापन – यह स्थितप्रज्ञ की ब्राह्मी स्थिति है। इसे प्राप्त कर व्यक्ति मोह से मुक्त हो जाता है और अन्त में मोक्ष पाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।