सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 69
श्लोक ६९ में संयमी और सांसारिक लोगों की जागृति का अन्तर बताया गया है।
संस्कृत श्लोक
या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी | यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ||६९||
yā niśā sarva-bhūtānāṃ tasyāṃ jāgarti saṃyamī | yasyāṃ jāgrati bhūtāni sā niśā paśyato muneḥ ||69||
पदच्छेद / शब्दार्थ
या: जो; निशा: रात्रि; सर्वभूतानाम्: समस्त प्राणियों की; तस्याम्: उसमें; जागर्ति: जागता है; संयमी: संयमी; यस्याम्: जिसमें; जाग्रति: जागते हैं; भूतानि: प्राणी; सा: वह; निशा: रात्रि; पश्यतः: देखने वाले; मुनेः: मुनि की।
हिंदी अनुवाद
समस्त प्राणियों के लिए जो रात्रि (अज्ञान) है, उसमें संयमी पुरुष जागता है। जिस (विषय-भोग) में सब प्राणी जागते हैं, वह आत्मदर्शी मुनि के लिए रात्रि (अज्ञान) है।
English Translation
That which is night to all beings, in that the self-controlled man keeps awake. That in which all beings are awake, that is night to the sage who sees.
टीका / Commentary
संयमी के लिए संसार का भोग रात्रि (अज्ञान) के समान है, जबकि सांसारिक लोग उसमें जागते हैं। परमार्थ की जागृति संयमी में होती है, जबकि सांसारिक उसमें सोते हैं।