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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 69

अध्याय 2 · श्लोक 69

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी | यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ||६९||

yā niśā sarva-bhūtānāṃ tasyāṃ jāgarti saṃyamī | yasyāṃ jāgrati bhūtāni sā niśā paśyato muneḥ ||69||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

या: जो; निशा: रात्रि; सर्वभूतानाम्: समस्त प्राणियों की; तस्याम्: उसमें; जागर्ति: जागता है; संयमी: संयमी; यस्याम्: जिसमें; जाग्रति: जागते हैं; भूतानि: प्राणी; सा: वह; निशा: रात्रि; पश्यतः: देखने वाले; मुनेः: मुनि की।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

समस्त प्राणियों के लिए जो रात्रि (अज्ञान) है, उसमें संयमी पुरुष जागता है। जिस (विषय-भोग) में सब प्राणी जागते हैं, वह आत्मदर्शी मुनि के लिए रात्रि (अज्ञान) है।

English Translation

That which is night to all beings, in that the self-controlled man keeps awake. That in which all beings are awake, that is night to the sage who sees.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

संयमी के लिए संसार का भोग रात्रि (अज्ञान) के समान है, जबकि सांसारिक लोग उसमें जागते हैं। परमार्थ की जागृति संयमी में होती है, जबकि सांसारिक उसमें सोते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।