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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 68

अध्याय 2 · श्लोक 68

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ||६८||

tasmād yasya mahābāho nigṛhītāni sarvaśaḥ | indriyāṇīndriyārthebhyas tasya prajñā pratiṣṭhitā ||68||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्मात्: इसलिए; यस्य: जिसके; महाबाहो: हे महाबाहो; निगृहीतानि: रोके गए; सर्वशः: सब प्रकार से; इन्द्रियाणि: इन्द्रियाँ; इन्द्रियार्थेभ्यः: इन्द्रियों के विषयों से; तस्य: उसकी; प्रज्ञा: प्रज्ञा; प्रतिष्ठिता: स्थिर है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रिय-विषयों से सब प्रकार से रोक ली गई हैं, उसकी प्रज्ञा स्थिर है।

English Translation

Therefore, O mighty-armed, one whose senses are completely restrained from their objects – his wisdom is steady.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

निष्कर्ष – जिसकी इन्द्रियाँ पूरी तरह विषयों से हटा ली गई हैं, उसकी बुद्धि स्थिर होती है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।