सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 68
श्लोक ६८ में निष्कर्ष दिया गया है कि इन्द्रियों को विषयों से रोकने से प्रज्ञा स्थिर होती है।
संस्कृत श्लोक
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः | इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ||६८||
tasmād yasya mahābāho nigṛhītāni sarvaśaḥ | indriyāṇīndriyārthebhyas tasya prajñā pratiṣṭhitā ||68||
पदच्छेद / शब्दार्थ
तस्मात्: इसलिए; यस्य: जिसके; महाबाहो: हे महाबाहो; निगृहीतानि: रोके गए; सर्वशः: सब प्रकार से; इन्द्रियाणि: इन्द्रियाँ; इन्द्रियार्थेभ्यः: इन्द्रियों के विषयों से; तस्य: उसकी; प्रज्ञा: प्रज्ञा; प्रतिष्ठिता: स्थिर है।
हिंदी अनुवाद
इसलिए हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ इन्द्रिय-विषयों से सब प्रकार से रोक ली गई हैं, उसकी प्रज्ञा स्थिर है।
English Translation
Therefore, O mighty-armed, one whose senses are completely restrained from their objects – his wisdom is steady.
टीका / Commentary
निष्कर्ष – जिसकी इन्द्रियाँ पूरी तरह विषयों से हटा ली गई हैं, उसकी बुद्धि स्थिर होती है।