सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 66
श्लोक ६६ में अयुक्त व्यक्ति की दशा बताई गई है – उसके पास बुद्धि, ध्यान, शान्ति या सुख कुछ नहीं।
संस्कृत श्लोक
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना | न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ||६६||
nāsti buddhir ayuktasya na cāyuktasya bhāvanā | na cābhāvayataḥ śāntir aśāntasya kutaḥ sukham ||66||
पदच्छेद / शब्दार्थ
न: नहीं; अस्ति: है; बुद्धिः: बुद्धि; अयुक्तस्य: अयुक्त (असंयत) का; न: नहीं; च: और; अयुक्तस्य: अयुक्त का; भावना: भावना (ध्यान); न: नहीं; च: और; अभावयतः: ध्यान न करने वाले का; शान्तिः: शान्ति; अशान्तस्य: अशान्त का; कुतः: कहाँ; सुखम्: सुख।
हिंदी अनुवाद
अयुक्त (असंयत) पुरुष की न तो बुद्धि होती है, न भावना (ध्यान) होती है, और न ध्यान किए बिना शान्ति होती है। अशान्त को सुख कहाँ?
English Translation
One who is not connected with the Supreme (through yoga) has neither steady intellect nor meditation. Without meditation, there is no peace. Without peace, how can there be happiness?
टीका / Commentary
असंयत व्यक्ति के पास न तो सही बुद्धि होती है, न ध्यान। बिना ध्यान के शान्ति नहीं, और बिना शान्ति के सुख नहीं।