सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 65
श्लोक ६५ में शान्ति के महत्व को बताया गया है – इससे सब दुःख मिटते हैं और बुद्धि स्थिर होती है।
संस्कृत श्लोक
प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते | प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते ||६५||
prasāde sarva-duḥkhānāṃ hānir asyopajāyate | prasanna-cetaso hy āśu buddhiḥ paryavatiṣṭhate ||65||
पदच्छेद / शब्दार्थ
प्रसादे: प्रसाद (शान्ति) प्राप्त होने पर; सर्वदुःखानाम्: सब दुःखों की; हानिः: हानि; अस्य: इसकी; उपजायते: हो जाती है; प्रसन्नचेतसः: प्रसन्न चित्त वाले की; हि: निश्चय ही; आशु: शीघ्र; बुद्धिः: बुद्धि; पर्यवतिष्ठते: सम्यक् प्रकार से स्थित हो जाती है।
हिंदी अनुवाद
उस प्रसाद (शान्ति) के प्राप्त होने पर इसके (साधक के) सब दुःखों का नाश हो जाता है, क्योंकि प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है।
English Translation
In that peace, all sorrows are destroyed. For the intellect of one who is peaceful and content soon becomes steady.
टीका / Commentary
शान्ति प्राप्त होने पर सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं, और प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि स्थिर हो जाती है।