आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 65

अध्याय 2 · श्लोक 65

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते | प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते ||६५||

prasāde sarva-duḥkhānāṃ hānir asyopajāyate | prasanna-cetaso hy āśu buddhiḥ paryavatiṣṭhate ||65||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

प्रसादे: प्रसाद (शान्ति) प्राप्त होने पर; सर्वदुःखानाम्: सब दुःखों की; हानिः: हानि; अस्य: इसकी; उपजायते: हो जाती है; प्रसन्नचेतसः: प्रसन्न चित्त वाले की; हि: निश्चय ही; आशु: शीघ्र; बुद्धिः: बुद्धि; पर्यवतिष्ठते: सम्यक् प्रकार से स्थित हो जाती है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उस प्रसाद (शान्ति) के प्राप्त होने पर इसके (साधक के) सब दुःखों का नाश हो जाता है, क्योंकि प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है।

English Translation

In that peace, all sorrows are destroyed. For the intellect of one who is peaceful and content soon becomes steady.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

शान्ति प्राप्त होने पर सभी दुःख नष्ट हो जाते हैं, और प्रसन्न चित्त वाले की बुद्धि स्थिर हो जाती है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।