सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 63

श्लोक ६३ में क्रोध से लेकर सर्वनाश तक की श्रृंखला बताई गई है।

संस्कृत श्लोक

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः | स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||६३||

krodhād bhavati sammohaḥ sammohāt smṛti-vibhramaḥ | smṛti-bhraṃśād buddhi-nāśo buddhi-nāśāt praṇaśyati ||63||

पदच्छेद / शब्दार्थ

क्रोधात्: क्रोध से; भवति: होता है; सम्मोहः: मोह; सम्मोहात्: मोह से; स्मृतिविभ्रमः: स्मृति का भ्रम; स्मृतिभ्रंशात्: स्मृति के भ्रंश (नाश) से; बुद्धिनाशः: बुद्धि का नाश; बुद्धिनाशात्: बुद्धि नाश से; प्रणश्यति: नष्ट हो जाता है (पतित हो जाता है)।

हिंदी अनुवाद

क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति-भ्रम होता है, स्मृति-भ्रम से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि-नाश से मनुष्य नष्ट (पतित) हो जाता है।

English Translation

From anger comes delusion; from delusion, loss of memory; from loss of memory, destruction of discrimination; from destruction of discrimination, he perishes.

टीका / Commentary

क्रोध से मोह, मोह से स्मृतिभ्रम, स्मृतिभ्रम से बुद्धिनाश, और बुद्धिनाश से सर्वनाश। यह क्रम बताता है कि कैसे एक व्यक्ति पतन के गर्त में गिरता है।