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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 63

अध्याय 2 · श्लोक 63

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः | स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ||६३||

krodhād bhavati sammohaḥ sammohāt smṛti-vibhramaḥ | smṛti-bhraṃśād buddhi-nāśo buddhi-nāśāt praṇaśyati ||63||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

क्रोधात्: क्रोध से; भवति: होता है; सम्मोहः: मोह; सम्मोहात्: मोह से; स्मृतिविभ्रमः: स्मृति का भ्रम; स्मृतिभ्रंशात्: स्मृति के भ्रंश (नाश) से; बुद्धिनाशः: बुद्धि का नाश; बुद्धिनाशात्: बुद्धि नाश से; प्रणश्यति: नष्ट हो जाता है (पतित हो जाता है)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति-भ्रम होता है, स्मृति-भ्रम से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि-नाश से मनुष्य नष्ट (पतित) हो जाता है।

English Translation

From anger comes delusion; from delusion, loss of memory; from loss of memory, destruction of discrimination; from destruction of discrimination, he perishes.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

क्रोध से मोह, मोह से स्मृतिभ्रम, स्मृतिभ्रम से बुद्धिनाश, और बुद्धिनाश से सर्वनाश। यह क्रम बताता है कि कैसे एक व्यक्ति पतन के गर्त में गिरता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।