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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 62

अध्याय 2 · श्लोक 62

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते | सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ||६२||

dhyāyato viṣayān puṃsaḥ saṅgas teṣūpajāyate | saṅgāt sañjāyate kāmaḥ kāmāt krodho 'bhijāyate ||62||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ध्यायतः: चिन्तन करते हुए; विषयान्: विषयों का; पुंसः: पुरुष के; सङ्गः: आसक्ति; तेषु: उनमें; उपजायते: उत्पन्न होती है; सङ्गात्: आसक्ति से; सञ्जायते: उत्पन्न होता है; कामः: कामना; कामात्: कामना से; क्रोधः: क्रोध; अभिजायते: उत्पन्न होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

विषयों का चिन्तन करते हुए पुरुष की उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से कामना उत्पन्न होती है, कामना से क्रोध उत्पन्न होता है।

English Translation

When a person dwells on sense objects, attachment to them arises. From attachment, desire is born. From desire, anger arises.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक पतन की प्रक्रिया बताता है – विषय-चिन्तन से आसक्ति, आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।