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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 6

अध्याय 2 · श्लोक 6

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः | यानेव हत्वा न जिजीविषामस्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ||६||

na caitad vidmaḥ kataran no garīyo yad vā jayema yadi vā no jayeyuḥ | yān eva hatvā na jijīviṣāmas te 'vasthitāḥ pramukhe dhārtarāṣṭrāḥ ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: नहीं; च: और; एतत्: यह; विद्मः: हम जानते हैं; कतरत्: कौन सा; नः: हमारे लिए; गरीयः: श्रेयस्कर; यत्: कि; वा: या; जयेम: हम जीतें; यदि: यदि; वा: या; न: हमें; जयेयुः: वे जीतें; यान्: जिनको; एव: निश्चय ही; हत्वा: मारकर; न: नहीं; जिजीविषामः: हम जीना चाहते; ते: वे; अवस्थिताः: खड़े हैं; प्रमुखे: सामने; धार्तराष्ट्राः: धृतराष्ट्र के पुत्र।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

और हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए क्या श्रेयस्कर है – कि हम उन्हें जीतें या वे हमें जीतें। जिन धृतराष्ट्र-पुत्रों को मारकर हम जीना नहीं चाहते, वे ही आज हमारे सामने खड़े हैं।

English Translation

Nor do we know which is better – whether we conquer them or they conquer us. The sons of Dhritarashtra, after killing whom we do not wish to live, are standing before us.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन की अनिश्चय की स्थिति और गहरी हो जाती है। वे कहते हैं कि युद्ध का परिणाम चाहे जो भी हो, यदि हमें अपनों को ही मारना पड़े तो विजय भी अर्थहीन है। यह मोह की चरम सीमा है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।