सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 59

श्लोक ५९ में बताया गया है कि ब्रह्म-साक्षात्कार के बाद ही विषयों का रस समाप्त होता है।

संस्कृत श्लोक

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः | रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते ||५९||

viṣayā vinivartante nirāhārasya dehinaḥ | rasa-varjaṃ raso 'py asya paraṃ dṛṣṭvā nivartate ||59||

पदच्छेद / शब्दार्थ

विषयाः: विषय; विनिवर्तन्ते: निवृत्त हो जाते हैं; निराहारस्य: आहार (भोग) का त्याग करने वाले; देहिनः: शरीरी की; रसवर्जम्: रस (स्वाद) को छोड़कर; रसः: रस; अपि: भी; अस्य: इसकी; परम्: परम (ब्रह्म); दृष्ट्वा: देखकर; निवर्तते: निवृत्त हो जाता है।

हिंदी अनुवाद

भोगों का त्याग करने वाले पुरुष के विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, पर उनका रस (आस्वाद) निवृत्त नहीं होता। किन्तु परम (ब्रह्म) को देख लेने पर उसका रस भी निवृत्त हो जाता है।

English Translation

The objects of the senses turn away from the abstinent person, leaving the longing behind. But even the longing turns away when one sees the Supreme.

टीका / Commentary

केवल भोगों का त्याग करने से उनकी इच्छा (रस) शेष रह जाती है, पर ब्रह्म-साक्षात्कार के बाद वह इच्छा भी समाप्त हो जाती है।