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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 4

अध्याय 2 · श्लोक 4

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच | कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन | इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ||४||

arjuna uvāca | kathaṃ bhīṣmam ahaṃ saṅkhye droṇaṃ ca madhusūdana | iṣubhiḥ pratiyotsyāmi pūjārhāv arisūdana ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: अर्जुन; उवाच: बोले; कथम्: कैसे; भीष्मम्: भीष्म पितामह; अहम्: मैं; सङ्ख्ये: युद्ध में; द्रोणम्: द्रोणाचार्य; च: और; मधुसूदन: हे मधुसूदन; इषुभिः: बाणों से; प्रतियोत्स्यामि: प्रतियुद्ध करूँगा; पूजार्हौ: पूजा के योग्य; अरिसूदन: हे शत्रुनाशक।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे मधुसूदन! हे शत्रुनाशक! जो भीष्म और द्रोण पूजा के योग्य हैं, उन पर मैं युद्ध में बाणों से कैसे प्रहार करूँगा?

English Translation

Arjuna said: O Madhusudana, how can I counter Bhishma and Drona with arrows in battle? They are both worthy of worship, O destroyer of enemies.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब अपने आपको सही ठहराने के लिए तर्क देते हैं। भीष्म (पितामह) और द्रोण (गुरु) उनके अत्यन्त सम्मानित बुजुर्ग हैं। उन पर बाण चलाना अर्जुन को अनुचित लगता है। "मधुसूदन" और "अरिसूदन" सम्बोधन दर्शाते हैं कि अर्जुन कृष्ण की शक्ति को स्वीकार करते हैं, फिर भी उनके मन में मोह है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।