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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 3

अध्याय 2 · श्लोक 3

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते | क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ||३||

klaibyaṃ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayy upapadyate | kṣudraṃ hṛdaya-daurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

क्लैब्यम्: नपुंसकता; मा स्म गमः: मत जा; पार्थ: हे पृथापुत्र; न: नहीं; एतत्: यह; त्वयि: तुझमें; उपपद्यते: उचित है; क्षुद्रम्: तुच्छ; हृदयदौर्बल्यम्: हृदय की दुर्बलता; त्यक्त्वा: त्याग कर; उत्तिष्ठ: खड़ा हो; परन्तप: हे शत्रुतापन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! नपुंसकता को मत प्राप्त हो। यह तुझमें उचित नहीं है। हे शत्रुतापन! हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर खड़ा हो जा।

English Translation

O Partha, yield not to unmanliness. It does not befit you. O scorcher of foes, give up this petty faint-heartedness and arise!

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण अब अर्जुन को उनकी क्षत्रिय प्रकृति का स्मरण कराते हैं। "पार्थ" और "परन्तप" सम्बोधन जानबूझकर हैं – वे अर्जुन को उनकी वीरता और कुल की याद दिलाते हैं। "क्लैब्य" (नपुंसकता) शब्द कठोर है, क्योंकि युद्ध से पीछे हटना एक क्षत्रिय के लिए सबसे बड़ा कलंक है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।