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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 34

अध्याय 2 · श्लोक 34

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् | सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ||३४||

akīrtiṃ cāpi bhūtāni kathayiṣyanti te 'vyayām | sambhāvitasya cākīrtir maraṇād atiricyate ||34||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अकीर्तिम्: अपयश; च: और; अपि: भी; भूतानि: प्राणी; कथयिष्यन्ति: कहेंगे; ते: तेरा; अव्ययाम्: अमिट; सम्भावितस्य: सम्मानित पुरुष का; च: और; अकीर्तिः: अपयश; मरणात्: मृत्यु से; अतिरिच्यते: बढ़कर है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तथा सब लोग तेरा अमिट अपयश कहेंगे, और सम्मानित पुरुष के लिए अपयश मृत्यु से भी बढ़कर है।

English Translation

People will recount your undying infamy. And for a man of honour, dishonour is worse than death.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कीर्ति का नाश और अपयश – यह मृत्यु से भी बुरा है। एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए अपयश असहनीय होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।