सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 33

श्लोक ३३ में युद्ध से विमुख होने पर स्वधर्म, कीर्ति का नाश और पाप की प्राप्ति बताई गई है।

संस्कृत श्लोक

अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि | ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ||३३||

atha cet tvam imaṃ dharmyaṃ saṅgrāmaṃ na kariṣyasi | tataḥ sva-dharmaṃ kīrtiṃ ca hitvā pāpam avāpsyasi ||33||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अथ: अब; चेत्: यदि; त्वम्: तू; इमम्: इस; धर्म्यम्: धर्मयुक्त; संग्रामम्: युद्ध को; न: नहीं; करिष्यसि: करेगा; ततः: तब; स्वधर्मम्: अपने धर्म को; कीर्तिम्: कीर्ति को; च: और; हित्वा: त्यागकर; पापम्: पाप; अवाप्स्यसि: प्राप्त होगा।

हिंदी अनुवाद

यदि तू इस धर्मयुद्ध को नहीं करेगा, तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा।

English Translation

But if you do not fight this righteous war, then you will fail in your duty, lose your reputation, and incur sin.

टीका / Commentary

युद्ध न करने के नकारात्मक परिणाम – स्वधर्म का त्याग, कीर्ति का नाश, और पाप की प्राप्ति।