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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 33

अध्याय 2 · श्लोक 33

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि | ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ||३३||

atha cet tvam imaṃ dharmyaṃ saṅgrāmaṃ na kariṣyasi | tataḥ sva-dharmaṃ kīrtiṃ ca hitvā pāpam avāpsyasi ||33||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अथ: अब; चेत्: यदि; त्वम्: तू; इमम्: इस; धर्म्यम्: धर्मयुक्त; संग्रामम्: युद्ध को; न: नहीं; करिष्यसि: करेगा; ततः: तब; स्वधर्मम्: अपने धर्म को; कीर्तिम्: कीर्ति को; च: और; हित्वा: त्यागकर; पापम्: पाप; अवाप्स्यसि: प्राप्त होगा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यदि तू इस धर्मयुद्ध को नहीं करेगा, तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा।

English Translation

But if you do not fight this righteous war, then you will fail in your duty, lose your reputation, and incur sin.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

युद्ध न करने के नकारात्मक परिणाम – स्वधर्म का त्याग, कीर्ति का नाश, और पाप की प्राप्ति।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।