आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 32

अध्याय 2 · श्लोक 32

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् | सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् ||३२||

yadṛcchayā copapannaṃ svarga-dvāram apāvṛtam | sukhinaḥ kṣatriyāḥ pārtha labhante yuddham īdṛśam ||32||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यदृच्छया: अपने आप, अकारण; च: और; उपपन्नम्: प्राप्त; स्वर्गद्वारम्: स्वर्ग का द्वार; अपावृतम्: खुला हुआ; सुखिनः: सौभाग्यशाली; क्षत्रियाः: क्षत्रिय; पार्थ: हे पार्थ; लभन्ते: पाते हैं; युद्धम्: युद्ध; ईदृशम्: ऐसा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! ऐसा युद्ध जो बिना माँगे ही प्राप्त हुआ है और स्वर्ग का खुला द्वार है, उसे पाकर क्षत्रिय सौभाग्यशाली होते हैं।

English Translation

O Partha, happy are the Kshatriyas who get such an open door to heaven, offered by chance.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह युद्ध स्वतः ही (यदृच्छया) प्राप्त हुआ है और यह स्वर्ग का द्वार खोलने वाला है। ऐसा अवसर क्षत्रिय के लिए सौभाग्य की बात है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।