आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 28

अध्याय 2 · श्लोक 28

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत | अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ||२८||

avyaktādīni bhūtāni vyakta-madhyāni bhārata | avyakta-nidhanāny eva tatra kā paridevanā ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अव्यक्तादीनि: अव्यक्त (अप्रकट) आदि वाले; भूतानि: प्राणी; व्यक्तमध्यानि: मध्य में व्यक्त (प्रकट); भारत: हे भारत; अव्यक्तनिधनानि: अव्यक्त निधन (अन्त में अव्यक्त) वाले; एव: ही; तत्र: उस विषय में; का: क्या; परिदेवना: विलाप।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत! सभी प्राणी जन्म से पहले अव्यक्त थे, मध्य में (जीवन में) व्यक्त हैं, और मरने के बाद पुनः अव्यक्त हो जाते हैं। फिर ऐसी दशा में विलाप कैसा?

English Translation

All beings are unmanifest before birth, manifest in life, and again unmanifest after death. So why grieve, O Bharata?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तीन अवस्थाएँ – अतीत, वर्तमान, भविष्य – में केवल वर्तमान में शरीर व्यक्त है। शेष समय अव्यक्त। जो अव्यक्त था और अव्यक्त होगा, उसके व्यक्त रूप पर शोक करना व्यर्थ है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।