सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 28

श्लोक २८ में बताया गया है कि प्राणी जन्म से पहले और मृत्यु के बाद अव्यक्त रहते हैं, केवल बीच में व्यक्त – अतः शोक का कोई कारण नहीं।

संस्कृत श्लोक

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत | अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ||२८||

avyaktādīni bhūtāni vyakta-madhyāni bhārata | avyakta-nidhanāny eva tatra kā paridevanā ||28||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अव्यक्तादीनि: अव्यक्त (अप्रकट) आदि वाले; भूतानि: प्राणी; व्यक्तमध्यानि: मध्य में व्यक्त (प्रकट); भारत: हे भारत; अव्यक्तनिधनानि: अव्यक्त निधन (अन्त में अव्यक्त) वाले; एव: ही; तत्र: उस विषय में; का: क्या; परिदेवना: विलाप।

हिंदी अनुवाद

हे भारत! सभी प्राणी जन्म से पहले अव्यक्त थे, मध्य में (जीवन में) व्यक्त हैं, और मरने के बाद पुनः अव्यक्त हो जाते हैं। फिर ऐसी दशा में विलाप कैसा?

English Translation

All beings are unmanifest before birth, manifest in life, and again unmanifest after death. So why grieve, O Bharata?

टीका / Commentary

तीन अवस्थाएँ – अतीत, वर्तमान, भविष्य – में केवल वर्तमान में शरीर व्यक्त है। शेष समय अव्यक्त। जो अव्यक्त था और अव्यक्त होगा, उसके व्यक्त रूप पर शोक करना व्यर्थ है।