सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 25

श्लोक २५ में आत्मा को अव्यक्त, अचिन्त्य और अविकारी बताया गया है, इसलिए उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए।

संस्कृत श्लोक

अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते | तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि ||२५||

avyakto 'yam acintyo 'yam avikāryo 'yam ucyate | tasmād evaṃ viditvainaṃ nānuśocitum arhasi ||25||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अव्यक्तः: अव्यक्त (इन्द्रियों से परे); अयम्: यह; अचिन्त्यः: अचिन्त्य; अयम्: यह; अविकार्यः: अविकारी; अयम्: यह; उच्यते: कहा जाता है; तस्मात्: इसलिए; एवम्: इस प्रकार; विदित्वा: जानकर; एनम्: इस (आत्मा) को; न: नहीं; अनुशोचितुम्: शोक करना; अर्हसि: तू योग्य है।

हिंदी अनुवाद

यह आत्मा अव्यक्त (प्रकट न होने वाला), अचिन्त्य और अविकारी कहा गया है। इसलिए उसे इस प्रकार जानकर तुझे शोक नहीं करना चाहिए।

English Translation

It is said that this Self is unmanifest, inconceivable, and unchangeable. Therefore, knowing it as such, you should not grieve.

टीका / Commentary

आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य और अविकारी है – ये तीन विशेषण उसे भौतिक जगत से पूरी तरह अलग करते हैं। इसे जानकर शोक व्यर्थ है।