सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 24
श्लोक २४ में आत्मा के विभिन्न गुणों का वर्णन किया गया है।
संस्कृत श्लोक
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ||२४||
acchedyo 'yam adāhyo 'yam akledyo 'śoṣya eva ca | nityaḥ sarva-gataḥ sthāṇur acalo 'yaṃ sanātanaḥ ||24||
पदच्छेद / शब्दार्थ
अच्छेद्यः: अकाट्य; अयम्: यह; अदाह्यः: अदाह्य; अयम्: यह; अक्लेद्यः: अभेद्य (गीला न होने वाला); अशोष्यः: असुख्य (सूख न सकने वाला); एव: ही; च: और; नित्यः: नित्य; सर्वगतः: सर्वव्यापी; स्थाणुः: स्थिर; अचलः: अचल; अयम्: यह; सनातनः: सनातन।
हिंदी अनुवाद
यह आत्मा अच्छेद्य (काटा नहीं जा सकता), अदाह्य (जलाया नहीं जा सकता), अक्लेद्य (गीला नहीं किया जा सकता), और अशोष्य (सुखाया नहीं जा सकता) है। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।
English Translation
This Self is unbreakable, incombustible, and cannot be wetted nor dried. It is eternal, all-pervading, unchanging, immovable, and primeval.
टीका / Commentary
आत्मा के गुणों का और विस्तार – वह अच्छेद्य, अदाह्य आदि है, सर्वव्यापी और शाश्वत है।