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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 24

अध्याय 2 · श्लोक 24

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च | नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ||२४||

acchedyo 'yam adāhyo 'yam akledyo 'śoṣya eva ca | nityaḥ sarva-gataḥ sthāṇur acalo 'yaṃ sanātanaḥ ||24||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अच्छेद्यः: अकाट्य; अयम्: यह; अदाह्यः: अदाह्य; अयम्: यह; अक्लेद्यः: अभेद्य (गीला न होने वाला); अशोष्यः: असुख्य (सूख न सकने वाला); एव: ही; च: और; नित्यः: नित्य; सर्वगतः: सर्वव्यापी; स्थाणुः: स्थिर; अचलः: अचल; अयम्: यह; सनातनः: सनातन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यह आत्मा अच्छेद्य (काटा नहीं जा सकता), अदाह्य (जलाया नहीं जा सकता), अक्लेद्य (गीला नहीं किया जा सकता), और अशोष्य (सुखाया नहीं जा सकता) है। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।

English Translation

This Self is unbreakable, incombustible, and cannot be wetted nor dried. It is eternal, all-pervading, unchanging, immovable, and primeval.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

आत्मा के गुणों का और विस्तार – वह अच्छेद्य, अदाह्य आदि है, सर्वव्यापी और शाश्वत है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।