सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 23
श्लोक २३ में आत्मा की अप्रभाव्यता का वर्णन है – वह शस्त्र, अग्नि, जल, वायु से अप्रभावित है।
संस्कृत श्लोक
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः | न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ||२३||
nainaṃ chindanti śastrāṇi nainaṃ dahati pāvakaḥ | na cainaṃ kledayanty āpo na śoṣayati mārutaḥ ||23||
पदच्छेद / शब्दार्थ
न: नहीं; एनम्: इस (आत्मा) को; छिन्दन्ति: काटते हैं; शस्त्राणि: शस्त्र; न: नहीं; एनम्: इसको; दहति: जलाता है; पावकः: अग्नि; न: नहीं; च: और; एनम्: इसको; क्लेदयन्ति: गीला करते हैं; आपः: जल; न: नहीं; शोषयति: सुखाता है; मारुतः: वायु।
हिंदी अनुवाद
इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, अग्नि नहीं जला सकती, जल नहीं गीला कर सकता और वायु नहीं सुखा सकती।
English Translation
Weapons cannot cut It, fire cannot burn It, water cannot wet It, and wind cannot dry It.
टीका / Commentary
आत्मा पंचभौतिक तत्वों से परे है। वह अभौतिक है, इसलिए उस पर किसी भी भौतिक तत्व का प्रभाव नहीं होता।