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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 · श्लोक 20

अध्याय 2 · श्लोक 20

सांख्य योग (Sankhya Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः | अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे ||२०||

na jāyate mriyate vā kadācin nāyaṃ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ | ajo nityaḥ śāśvato 'yaṃ purāṇo na hanyate hanyamāne śarīre ||20||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: नहीं; जायते: जन्मता; म्रियते: मरता; वा: या; कदाचित्: कभी; न: नहीं; अयम्: यह; भूत्वा: उत्पन्न होकर; भविता: होगा; वा: या; न: नहीं; भूयः: फिर; अजः: अजन्मा; नित्यः: नित्य; शाश्वतः: शाश्वत; अयम्: यह; पुराणः: पुरातन; न: नहीं; हन्यते: मारा जाता; हन्यमाने: मारे जाने पर; शरीरे: शरीर के।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यह आत्मा न कभी जन्मता है, न मरता है, न एक बार होकर फिर नहीं होने वाला है। यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर यह नहीं मारा जाता।

English Translation

It is never born, nor does it ever die; nor having come into existence will it again cease to be. It is unborn, eternal, everlasting, and primeval. It is not slain when the body is slain.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक आत्मा की अजर-अमरता का सबसे प्रसिद्ध वर्णन है। आत्मा का न जन्म है, न मृत्यु। यह सदा रहता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।