सांख्य योग (Sankhya Yoga) – श्लोक 16

श्लोक १६ में सत् और असत् के स्वरूप का वर्णन है – असत् की सत्ता नहीं, सत् का अभाव नहीं।

संस्कृत श्लोक

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः | उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ||१६||

nāsato vidyate bhāvo nābhāvo vidyate sataḥ | ubhayor api dṛṣṭo 'ntas tv anayos tattva-darśibhiḥ ||16||

पदच्छेद / शब्दार्थ

न: नहीं; असतः: असत् (अविद्यमान) का; विद्यते: है; भावः: सत्ता; न: नहीं; अभावः: अभाव (नाश); विद्यते: है; सतः: सत् (विद्यमान) का; उभयोः: दोनों का; अपि: भी; दृष्टः: देखा गया है; अन्तः: निष्कर्ष; तु: निश्चय ही; अनयोः: इन दोनों का; तत्त्वदर्शिभिः: तत्त्वदर्शियों द्वारा।

हिंदी अनुवाद

असत् (नाशवान) की सत्ता नहीं है और सत् (अविनाशी) का नाश नहीं है। इन दोनों का यह तत्त्व तत्त्वदर्शियों ने जाना है।

English Translation

The unreal has no existence; the real never ceases to be. The seers of truth have concluded thus about both.

टीका / Commentary

यह श्लोक सत् और असत् का विवेचन करता है। शरीर आदि असत् हैं (नाशवान), आत्मा सत् है (अविनाशी)। तत्त्वदर्शी इस भेद को जानते हैं।