आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 4

अध्याय 18 · श्लोक 4

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

निश्चयं शृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम। त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः सम्प्रकीर्तितः॥४॥

niścayaṃ śṛṇu me tatra tyāge bharata-sattama | tyāgo hi puruṣa-vyāghra tri-vidhaḥ samprakīrtitaḥ ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

निश्चयम्: the certain truth; शृणु: hear; मे: My; तत्र: in that; त्यागे: concerning renunciation; भरत-सत्तम: O best of the Bharatas; त्यागः: renunciation; हि: indeed; पुरुष-व्याघ्र: O tiger among men; त्रि-विधः: of three kinds; सम्प्रकीर्तितः: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भरतश्रेष्ठ! उस त्याग के विषय में मेरे निश्चय को सुनो। हे पुरुषव्याघ्र! त्याग तीन प्रकार का कहा गया है।

English Translation

O best of the Bharatas, hear from Me the certain truth about renunciation. O tiger among men, renunciation is declared to be of three kinds.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अब त्याग के तीन प्रकार बताने जा रहे हैं, जो सात्त्विक, राजस और तामस में विभाजित है। यह वर्गीकरण साधक को उचित मार्ग चुनने में सहायक होगा।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।