आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 2

अध्याय 18 · श्लोक 2

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्रीभगवानुवाच काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः। सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः॥२॥

śrī-bhagavān uvāca kāmyānāṃ karmaṇāṃ nyāsaṃ sannyāsaṃ kavayo viduḥ | sarva-karma-phala-tyāgaṃ prāhus tyāgaṃ vicakṣaṇāḥ ||2||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्रीभगवान्: the Supreme Lord; उवाच: said; काम्यानाम्: of those done with desire; कर्मणाम्: of actions; न्यासम्: renunciation; संन्यासम्: sannyasa; कवयः: the learned; विदुः: know; सर्व-कर्म-फल-त्यागम्: abandonment of all fruits of actions; प्राहुः: call; त्यागम्: tyaga; विचक्षणाः: the wise.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

श्रीभगवान् बोले: काम्य कर्मों के त्याग को विद्वान् लोग संन्यास कहते हैं और सब कर्मों के फलों के त्याग को बुद्धिमान् लोग त्याग कहते हैं।

English Translation

The Supreme Lord said: The learned know sannyasa as the renunciation of actions done with desire; the wise declare tyaga as the abandonment of the fruits of all actions.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् स्पष्ट करते हैं कि संन्यास का अर्थ है सकाम कर्मों का त्याग, जबकि त्याग का अर्थ है सभी कर्मों के फलों का परित्याग। यह अंतर जीवन में कर्मयोग की साधना के लिए मौलिक है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।