आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 1

अध्याय 18 · श्लोक 1

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्। त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन॥१॥

arjuna uvāca sannyāsasya mahābāho tattvam icchāmi veditum | tyāgasya ca hṛṣīkeśa pṛthak keśi-niṣūdana ||1||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: Arjuna; उवाच: said; संन्यासस्य: of renunciation; महाबाहो: O mighty-armed; तत्त्वम्: the truth; इच्छामि: I wish; वेदितुम्: to know; त्यागस्य: of abandonment; च: and; हृषीकेश: O Hrishikesha; पृथक्: separately; केशिनिषूदन: O killer of Keshi.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे महाबाहो! हे हृषीकेश! हे केशिनिषूदन! मैं संन्यास और त्याग का तत्व अलग-अलग जानना चाहता हूँ।

English Translation

Arjuna said: O mighty-armed, I wish to know the truth about sannyasa (renunciation) and tyaga (abandonment), O Hrishikesha, and separately, O killer of Keshi.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन का प्रश्न गीता के अंतिम अध्याय का प्रारंभ है। वह संन्यास (कर्मों का त्याग) और त्याग (फल का त्याग) के बीच अंतर जानना चाहते हैं। यह जिज्ञासा आध्यात्मिक साधना के उच्चतम बिंदु को स्पर्श करती है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।