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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 11

अध्याय 18 · श्लोक 11

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः। यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते॥११॥

na hi deha-bhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇy aśeṣataḥ | yas tu karma-phala-tyāgī sa tyāgīty abhidhīyate ||11||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: not; हि: indeed; देहभृता: by the embodied; शक्यम्: possible; त्यक्तुम्: to abandon; कर्माणि: actions; अशेषतः: completely; य: who; तु: but; कर्म-फल-त्यागी: renouncer of the fruits of actions; स: he; त्यागी: renouncer; इति: thus; अभिधीयते: is called.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

देहधारी के लिए सम्पूर्ण कर्मों का त्याग करना सम्भव नहीं है। परन्तु जो कर्मफल का त्यागी है, वही त्यागी कहा जाता है।

English Translation

It is indeed impossible for an embodied being to give up all actions completely. But he who renounces the fruits of action is called a true renouncer.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् स्पष्ट करते हैं कि शारीरिक कर्मों का पूर्ण त्याग असम्भव है। इसलिए वास्तविक त्यागी वह है जो कर्म करते हुए फल की आसक्ति नहीं रखता। यही कर्मयोग का सार है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।