दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 8
श्लोक ८ में आसुरी लोगों का मत बताया गया: जगत् असत्य, आधारहीन, ईश्वररहित और केवल काम से उत्पन्न है।
संस्कृत श्लोक
असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम् | अपरस्परसम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम् || ८||
asatyam apratiṣṭhaṃ te jagad āhur anīśvaram | aparaspara-sambhūtaṃ kim anyat kāma-haitukam ||8||
पदच्छेद / शब्दार्थ
असत्यम्: असत्य; अप्रतिष्ठम्: आधारहीन; ते: वे; जगत्: जगत्; आहु: कहते हैं; अनीश्वरम्: ईश्वररहित; अपरस्परसम्भूतम्: परस्पर संयोग से उत्पन्न; किम्: क्या; अन्यत्: अन्य; कामहैतुकम्: कामना ही जिसका कारण है।
हिंदी अनुवाद
वे कहते हैं कि यह जगत् असत्य है, आधारहीन है, ईश्वररहित है, और केवल स्त्री-पुरुष के संयोग से उत्पन्न हुआ है – काम ही इसका कारण है।
English Translation
They say that the world is unreal, without foundation, without a God, and produced by sexual union alone, with no other cause but lust.
टीका / Commentary
आसुरी लोग भौतिकवादी दृष्टिकोण रखते हैं। वे ईश्वर को नकारते हैं और जगत् को आकस्मिक या केवल कामजन्य मानते हैं। यह नास्तिकता का चरम रूप है।