दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 6
श्लोक ६ में भगवान कहते हैं कि दो प्रकार के जीव हैं – दैवी और आसुरी। अब आसुरी का वर्णन सुनें।
संस्कृत श्लोक
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन्दैव आसुर एव च | दैवो विस्तरश: प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु || ६||
dvau bhūta-sargau loke 'smin daiva āsura eva ca | daivo vistaraśaḥ prokta āsuraṃ pārtha me śṛṇu ||6||
पदच्छेद / शब्दार्थ
द्वौ: दो; भूतसर्गौ: प्राणियों की सृष्टियाँ; लोके: लोक में; अस्मिन्: इस; दैव: दैवी; आसुर: आसुरी; एव: ही; च: और; दैव: दैवी; विस्तरश: विस्तार से; प्रोक्त: कही गई; आसुरम्: आसुरी; पार्थ: हे पार्थ; मे: मुझसे; शृणु: सुनो।
हिंदी अनुवाद
इस लोक में प्राणियों की दो सृष्टियाँ हैं – दैवी और आसुरी। दैवी का तो विस्तार से वर्णन किया गया; हे पार्थ! अब आसुरी सम्पदा को मुझसे सुनो।
English Translation
There are two types of beings in this world: the divine and the demoniac. The divine has been described at length; now hear from Me about the demoniac, O Partha.
टीका / Commentary
भगवान अब आसुरी प्रकृति का विस्तार से वर्णन करेंगे। पहले दैवी गुण बताए, अब आसुरी गुणों का वर्णन आवश्यक है ताकि उनसे बचा जा सके।