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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 · श्लोक 4

अध्याय 16 · श्लोक 4

दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोध: पारुष्यमेव च | अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् || ४||

dambho darpo 'bhimānaś ca krodhaḥ pāruṣyam eva ca | ajñānaṃ cābhijātasya pārtha sampadam āsurīm ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

दम्भ: दम्भ; दर्प: घमण्ड; अभिमान: अभिमान; च: और; क्रोध: क्रोध; पारुष्यम्: कठोरता; एव: ही; च: और; अज्ञानम्: अज्ञान; च: तथा; अभिजातस्य: उत्पन्न हुए; पार्थ: हे पार्थ; सम्पदम्: सम्पदा; आसुरीम्: आसुरी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! दम्भ, घमण्ड, अभिमान, क्रोध, कठोरता और अज्ञान — ये सब आसुरी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुए पुरुष के लक्षण हैं।

English Translation

O Partha (Arjuna), the qualities of those born with demoniac nature are hypocrisy, arrogance, conceit, anger, harshness and ignorance.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान आसुरी प्रकृति के लक्षण बताते हैं। दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, पारुष्य और अज्ञान – ये छः आसुरी गुण हैं। ये मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।