दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) – श्लोक 4

श्लोक ४ में दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, कठोरता और अज्ञान – आसुरी गुण बताए गए हैं।

संस्कृत श्लोक

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोध: पारुष्यमेव च | अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् || ४||

dambho darpo 'bhimānaś ca krodhaḥ pāruṣyam eva ca | ajñānaṃ cābhijātasya pārtha sampadam āsurīm ||4||

पदच्छेद / शब्दार्थ

दम्भ: दम्भ; दर्प: घमण्ड; अभिमान: अभिमान; च: और; क्रोध: क्रोध; पारुष्यम्: कठोरता; एव: ही; च: और; अज्ञानम्: अज्ञान; च: तथा; अभिजातस्य: उत्पन्न हुए; पार्थ: हे पार्थ; सम्पदम्: सम्पदा; आसुरीम्: आसुरी।

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! दम्भ, घमण्ड, अभिमान, क्रोध, कठोरता और अज्ञान — ये सब आसुरी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुए पुरुष के लक्षण हैं।

English Translation

O Partha (Arjuna), the qualities of those born with demoniac nature are hypocrisy, arrogance, conceit, anger, harshness and ignorance.

टीका / Commentary

अब भगवान आसुरी प्रकृति के लक्षण बताते हैं। दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, पारुष्य और अज्ञान – ये छः आसुरी गुण हैं। ये मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं।