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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 · श्लोक 19

अध्याय 16 · श्लोक 19

दैवासुर संपद्विभाग योग (Daivasura Sampad Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तानहं द्विषत: क्रूरान्संसारेषु नराधमान् | क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु || १९||

tān ahaṃ dviṣataḥ krūrān saṃsāreṣu narādhamān | kṣipāmy ajasram aśubhān āsurīṣv eva yoniṣu ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तान्: उन; अहम्: मैं; द्विषत: द्वेष करने वालों को; क्रूरान्: क्रूर; संसारेषु: संसारों में; नराधमान्: नराधमों को; क्षिपामि: डालता हूँ; अजस्रम्: बारम्बार; अशुभान्: अशुभ; आसुरीषु: आसुरी; एव: ही; योनिषु: योनियों में।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उन द्वेष करने वाले क्रूर, नराधम, अशुभ लोगों को मैं बारम्बार संसार में आसुरी योनियों में ही डालता हूँ।

English Translation

These cruel haters, the worst among men in the world, I hurl perpetually into demoniac wombs.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान कहते हैं कि ऐसे द्वेषी, क्रूर, नराधम लोगों को वह बार-बार आसुरी योनियों में डालता है, जहाँ वे और अधिक पतित होते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।