पुरुषोत्तम योग (Purushottama Yoga) – श्लोक 20

श्लोक २० में भगवान कहते हैं कि यह अति गोपनीय ज्ञान है; इसे जानकर मनुष्य बुद्धिमान और कृतार्थ हो जाता है।

संस्कृत श्लोक

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ । एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥ २०॥

iti guhya-tamaṃ śāstram idam uktaṃ mayānagha | etad buddhvā buddhimān syāt kṛta-kṛtyaś ca bhārata ||20||

पदच्छेद / शब्दार्थ

इति: इस प्रकार; गुह्यतमम्: अति गोपनीय; शास्त्रम्: शास्त्र (ज्ञान); इदम्: यह; उक्तम्: कहा गया; मया: मेरे द्वारा; अनघ: हे निष्पाप (अर्जुन); एतत्: इस (ज्ञान) को; बुद्ध्वा: समझकर; बुद्धिमान्: बुद्धिमान्; स्यात्: हो जाता है; कृतकृत्यः: कृतकृत्य (कृतार्थ, सफल); च: और; भारत: हे भारत।

हिंदी अनुवाद

हे अनघ (निष्पाप अर्जुन)! इस प्रकार यह अति गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया। इसे समझकर मनुष्य बुद्धिमान् और कृतकृत्य (कृतार्थ) हो जाता है, हे भारत।

English Translation

Thus, O sinless one (Arjuna), this most secret scripture has been spoken by Me. Understanding this, one becomes wise and his all duties are accomplished, O Bharata.

टीका / Commentary

भगवान अध्याय १५ का उपसंहार करते हुए कहते हैं कि यह अति गोपनीय ज्ञान है। इसे समझ लेने पर मनुष्य बुद्धिमान और कृतार्थ हो जाता है।