आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 6

अध्याय 12 · श्लोक 6

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः । अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते ॥ ६॥

ye tu sarvāṇi karmāṇi mayi sannyasya mat-parāḥ | ananyenaiva yogena māṃ dhyāyanta upāsate ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ये: who; तु: but; सर्वाणि: all; कर्माणि: actions; मयि: unto Me; संन्यस्य: renouncing; मत्-पराः: intent on Me; अनन्येन: exclusive; एव: certainly; योगेन: by yoga; माम्: Me; ध्यायन्त: meditating; उपासते: worship.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

परन्तु जो सब कर्मों को मुझमें समर्पित करके, मेरे परायण होकर, अनन्य योग से मेरा ध्यान करते हुए मेरी उपासना करते हैं,

English Translation

But those who worship Me, renouncing all actions in Me, intent on Me, meditating on Me with exclusive devotion,

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान सगुण भक्तों का वर्णन करते हैं जो सब कर्म मुझे समर्पित करके, मेरे परायण होकर, अनन्य भाव से मेरा ध्यान करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।