आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 5

अध्याय 12 · श्लोक 5

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

क्लेशोऽधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम् । अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्भिरवाप्यते ॥ ५॥

kleśo 'dhikataras teṣām avyaktāsakta-cetasām | avyaktā hi gatir duḥkhaṃ dehavadbhir avāpyate ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

क्लेश: difficulty; अधिकतर: greater; तेषाम्: for those; अव्यक्त-आसक्त-चेतसाम्: whose minds are attached to the unmanifest; अव्यक्ता: the unmanifest; हि: indeed; गति: goal; दुःखम्: with difficulty; देहवद्भि: by the embodied; अवाप्यते: is attained.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिनका चित्त अव्यक्त (निर्गुण ब्रह्म) में आसक्त है, उनके लिए क्लेश अधिक है, क्योंकि अव्यक्त गति (लक्ष्य) को देहधारी (साधक) बड़े कष्ट से प्राप्त करते हैं।

English Translation

Greater is the difficulty of those whose minds are attached to the unmanifest, for the goal of the unmanifest is very hard for the embodied beings to attain.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान अब स्पष्ट करते हैं कि निर्गुण ब्रह्म की उपासना का मार्ग अधिक कठिन है क्योंकि इन्द्रियों से परे उस निराकार तत्व पर मन को एकाग्र करना देहाभिमानी जीव के लिए अत्यंत दुष्कर है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।