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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 9

अध्याय 11 · श्लोक 9

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सञ्जय उवाच । एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः । दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥ ९॥

sañjaya uvāca | evam uktvā tato rājan mahā-yogeśvaro hariḥ | darśayām āsa pārthāya paramaṃ rūpam aiśvaram ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सञ्जय: संजय; उवाच: बोले; एवम्: इस प्रकार; उक्त्वा: कहकर; ततः: तब; राजन्: हे राजन्; महायोगेश्वर: महायोगेश्वर; हरिः: हरि (कृष्ण); दर्शयामास: दिखाया; पार्थाय: अर्जुन को; परमम्: परम; रूपम्: रूप; ऐश्वरम्: ऐश्वर्यमय।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

संजय बोले: हे राजन्, इस प्रकार कहकर तब महायोगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया।

English Translation

Sanjaya said: O King, having spoken thus, the great Lord of yoga, Hari, then showed to Arjuna His supreme divine form.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि कैसे भगवान् ने अर्जुन को विराट रूप दिखाया।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।