विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 8
श्लोक ८ में भगवान् अर्जुन को दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं। Verse 8: Krishna grants Arjuna divine sight to behold His form.
संस्कृत श्लोक
न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा । दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥ ८॥
na tu māṃ śakyase draṣṭum anenaiva sva-cakṣuṣā | divyaṃ dadāmi te cakṣuḥ paśya me yogam aiśvaram ||8||
पदच्छेद / शब्दार्थ
न: नहीं; तु: परन्तु; माम्: मुझे; शक्यसे: तू समर्थ है; द्रष्टुम्: देखने में; अनेन: इस; एव: ही; स्वचक्षुषा: अपनी आँखों से; दिव्यम्: दिव्य; ददामि: देता हूँ; ते: तुझे; चक्षुः: नेत्र; पश्य: देख; मे: मेरा; योगम्: योग; ऐश्वरम्: ऐश्वर्यमय।
हिंदी अनुवाद
परन्तु तू अपनी इन आँखों से मुझे नहीं देख सकता; इसलिए मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ। तू मेरे ऐश्वर्यमय योग को देख।
English Translation
But you cannot see Me with your present eyes; therefore I give you divine eyes. Behold My divine power!
टीका / Commentary
भगवान् अर्जुन को दिव्य दृष्टि प्रदान करते हैं क्योंकि साधारण नेत्रों से विराट रूप के दर्शन संभव नहीं हैं।