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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 7

अध्याय 11 · श्लोक 7

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् । मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥ ७॥

ihaika-sthaṃ jagat kṛtsnaṃ paśyādya sa-carācaram | mama dehe guḍākeśa yac cānyad draṣṭum icchasi ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

इह: यहाँ; एकस्थम्: एक ही स्थान पर स्थित; जगत्: जगत्; कृत्स्नम्: सम्पूर्ण; पश्य: देख; अद्य: अब; सचराचरम्: चर और अचर सहित; मम: मेरे; देहे: शरीर में; गुडाकेश: हे गुडाकेश; यत्: जो; च: और; अन्यत्: अन्य; द्रष्टुम्: देखना; इच्छसि: तुम चाहते हो।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।

English Translation

Now behold, O Gudakesha, in this body of Mine the whole universe, including the moving and the non-moving, gathered together here, and whatever else you wish to see.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अर्जुन को अपने शरीर में सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन का वचन देते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।