विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 7
श्लोक ७ में भगवान् कहते हैं कि मेरे शरीर में सम्पूर्ण जगत को देखो। Verse 7: Krishna says, behold the entire universe in My body.
संस्कृत श्लोक
इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम् । मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि ॥ ७॥
ihaika-sthaṃ jagat kṛtsnaṃ paśyādya sa-carācaram | mama dehe guḍākeśa yac cānyad draṣṭum icchasi ||7||
पदच्छेद / शब्दार्थ
इह: यहाँ; एकस्थम्: एक ही स्थान पर स्थित; जगत्: जगत्; कृत्स्नम्: सम्पूर्ण; पश्य: देख; अद्य: अब; सचराचरम्: चर और अचर सहित; मम: मेरे; देहे: शरीर में; गुडाकेश: हे गुडाकेश; यत्: जो; च: और; अन्यत्: अन्य; द्रष्टुम्: देखना; इच्छसि: तुम चाहते हो।
हिंदी अनुवाद
हे गुडाकेश, अब तू मेरे इस शरीर में सम्पूर्ण चर-अचर सहित समस्त जगत् को एक साथ देख तथा और भी जो कुछ तू देखना चाहता है, उसे देख।
English Translation
Now behold, O Gudakesha, in this body of Mine the whole universe, including the moving and the non-moving, gathered together here, and whatever else you wish to see.
टीका / Commentary
भगवान् अर्जुन को अपने शरीर में सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन का वचन देते हैं।