विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 6
श्लोक ६ में भगवान् अर्जुन को देवताओं और अद्भुत दृश्यों को देखने के लिए कहते हैं। Verse 6: Krishna invites Arjuna to see the gods and wonders.
संस्कृत श्लोक
पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा । बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥ ६॥
paśyādityān vasūn rudrān aśvinau marutas tathā | bahūny adṛṣṭa-pūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata ||6||
पदच्छेद / शब्दार्थ
पश्य: देख; आदित्यान्: आदित्यों को; वसून्: वसुओं को; रुद्रान्: रुद्रों को; अश्विनौ: अश्विनीकुमारों को; मरुतः: मरुतों को; तथा: भी; बहूनि: अनेक; अदृष्टपूर्वाणि: पहले न देखे हुए; पश्य: देख; आश्चर्याणि: आश्चर्यों को; भारत: हे भारत।
हिंदी अनुवाद
हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।
English Translation
Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Ashvins and the Maruts; behold many wonders never seen before, O Bharata.
टीका / Commentary
भगवान् अर्जुन को विराट रूप में स्थित विभिन्न देवताओं के दर्शन का आश्वासन देते हैं।