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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 6

अध्याय 11 · श्लोक 6

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा । बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥ ६॥

paśyādityān vasūn rudrān aśvinau marutas tathā | bahūny adṛṣṭa-pūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

पश्य: देख; आदित्यान्: आदित्यों को; वसून्: वसुओं को; रुद्रान्: रुद्रों को; अश्विनौ: अश्विनीकुमारों को; मरुतः: मरुतों को; तथा: भी; बहूनि: अनेक; अदृष्टपूर्वाणि: पहले न देखे हुए; पश्य: देख; आश्चर्याणि: आश्चर्यों को; भारत: हे भारत।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, अश्विनीकुमारों और मरुतों को देख; तथा बहुत से पहले न देखे हुए आश्चर्यों को भी देख।

English Translation

Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Ashvins and the Maruts; behold many wonders never seen before, O Bharata.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अर्जुन को विराट रूप में स्थित विभिन्न देवताओं के दर्शन का आश्वासन देते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।