विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 10

श्लोक १० में अर्जुन द्वारा देखे गए विराट रूप का वर्णन है। Verse 10: Description of the universal form seen by Arjuna.

संस्कृत श्लोक

अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् । अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥ १०॥

aneka-vaktra-nayanam anekādbhuta-darśanam | aneka-divyābharaṇaṃ divyānekodyatāyudham ||10||

पदच्छेद / शब्दार्थ

अनेक: अनेक; वक्त्र: मुख; नयनम्: नेत्रों वाला; अनेक: अनेक; अद्भुत: अद्भुत; दर्शनम्: दर्शन वाला; अनेक: अनेक; दिव्य: दिव्य; आभरणम्: आभूषणों वाला; दिव्य: दिव्य; अनेक: अनेक; उद्यत: उठाए हुए; आयुधम्: शस्त्रों वाला।

हिंदी अनुवाद

उस विराट रूप के अनेक मुख और नेत्र थे, अनेक अद्भुत दृश्य थे, अनेक दिव्य आभूषण थे और अनेक दिव्य शस्त्र उठे हुए थे।

English Translation

(Arjuna saw) the Universal Form with many mouths and eyes, and many wonderful sights, with many divine ornaments, and many divine weapons upraised.

टीका / Commentary

अर्जुन द्वारा देखे गए विराट रूप का वर्णन प्रारंभ होता है।