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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 · श्लोक 50

अध्याय 11 · श्लोक 50

विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सञ्जय उवाच । इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः । आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ॥ ५०॥

sañjaya uvāca | ity arjunaṃ vāsudevas tathoktvā svakaṃ rūpaṃ darśayām āsa bhūyaḥ | āśvāsayām āsa ca bhītam enaṃ bhūtvā punaḥ saumya-vapur mahātmā ||50||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सञ्जय: संजय; उवाच: बोले; इति: इस प्रकार; अर्जुनम्: अर्जुन से; वासुदेवः: वासुदेव (कृष्ण); तथा: इस प्रकार; उक्त्वा: कहकर; स्वकम्: अपना; रूपम्: रूप; दर्शयामास: दिखाया; भूयः: फिर; आश्वासयामास: आश्वासन दिया; च: और; भीतम्: भयभीत; एनम्: इस (अर्जुन) को; भूत्वा: होकर; पुनः: फिर; सौम्यवपुः: सौम्य शरीर वाले; महात्मा: महात्मा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

संजय बोले: इस प्रकार अर्जुन से कहकर वासुदेव ने फिर अपना (चतुर्भुज) रूप दिखाया। महात्मा ने पुनः सौम्य रूप धारण कर उस भयभीत अर्जुन को आश्वासन दिया।

English Translation

Sanjaya said: Having spoken thus to Arjuna, Vasudeva again showed His own form. Assuming a gentle form, the great soul reassured him, who was terrified.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

संजय बताते हैं कि कृष्ण ने चतुर्भुज रूप दिखाकर अर्जुन को आश्वस्त किया।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।