विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 49
श्लोक ४९ में भगवान् अर्जुन को भय मुक्त करके पूर्व रूप दिखाने को कहते हैं। Verse 49: The Lord asks Arjuna to behold His former form without fear.
संस्कृत श्लोक
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् । व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य ॥ ४९॥
mā te vyathā mā ca vimūḍha-bhāvo dṛṣṭvā rūpaṃ ghoram īdṛṅ mamedam | vyapeta-bhīḥ prīta-manāḥ punas tvaṃ tad eva me rūpam idaṃ prapaśya ||49||
पदच्छेद / शब्दार्थ
मा: मत; ते: तुम्हें; व्यथा: पीड़ा; मा: मत; च: और; विमूढभावः: विमूढ भाव; दृष्ट्वा: देखकर; रूपम्: रूप; घोरम्: घोर; ईदृक्: ऐसा; मम: मेरा; इदम्: यह; व्यपेतभीः: भय रहित; प्रीतमनाः: प्रसन्न मन वाला; पुनः: फिर; त्वम्: तुम; तत्: उस; एव: ही; मे: मेरे; रूपम्: रूप; इदम्: इस; प्रपश्य: देखो।
हिंदी अनुवाद
मेरे इस घोर रूप को देखकर तुम्हें पीड़ा या विमूढभाव नहीं होना चाहिए। भय रहित और प्रसन्न मन से तुम मेरे इस पूर्व रूप को फिर से देखो।
English Translation
Be not afraid, nor bewildered, on seeing this terrible form of Mine. With your fear gone and your mind pleased, behold again this former form of Mine.
टीका / Commentary
भगवान् अर्जुन को भय मुक्त करके पुनः चतुर्भुज रूप दिखाने का वचन देते हैं।