विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 46
श्लोक ४६ में अर्जुन भगवान् से चतुर्भुज रूप में दर्शन देने की प्रार्थना करते हैं। Verse 46: Arjuna prays to see the Lord in His four-armed form.
संस्कृत श्लोक
किरीटिनं गदिनं चक्रहस्तमिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव । तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते ॥ ४६॥
kirīṭinaṃ gadinaṃ cakra-hastam icchāmi tvāṃ draṣṭum ahaṃ tathaiva | tenaiva rūpeṇa catur-bhujena sahasra-bāho bhava viśva-mūrte ||46||
पदच्छेद / शब्दार्थ
किरीटिनम्: मुकुट धारण किए हुए; गदिनम्: गदा धारण किए हुए; चक्रहस्तम्: हाथ में चक्र लिए हुए; इच्छामि: चाहता हूँ; त्वाम्: आपको; द्रष्टुम्: देखना; अहम्: मैं; तथैव: वैसे ही; तेन: उस; एव: ही; रूपेण: रूप से; चतुर्भुजेन: चार भुजाओं वाले; सहस्रबाहो: हे सहस्रबाहो; भव: हों; विश्वमूर्ते: हे विश्वमूर्ते।
हिंदी अनुवाद
मैं आपको वैसे ही मुकुट धारण किए, गदा और हाथ में चक्र लिए देखना चाहता हूँ। हे सहस्रबाहो, हे विश्वमूर्ते, आप उसी चतुर्भुज रूप में प्रकट हों।
English Translation
I wish to see You as before, crowned, bearing a mace, and with a discus in hand. Assume that four-armed form, O thousand-armed, O universal form.
टीका / Commentary
अर्जुन स्पष्ट रूप से चतुर्भुज विष्णु रूप की याचना करते हैं।