विश्वरूप दर्शन योग (Visvarupa Darsana Yoga) – श्लोक 40
श्लोक ४० में अर्जुन भगवान् को सब ओर से नमस्कार करते हैं। Verse 40: Arjuna salutes the Lord from all sides, acknowledging His omnipresence.
संस्कृत श्लोक
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व । अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥ ४०॥
namaḥ purastād atha pṛṣṭhatas te namo 'stu te sarvata eva sarva | ananta-vīryāmita-vikramas tvaṃ sarvaṃ samāpnoṣi tato 'si sarvaḥ ||40||
पदच्छेद / शब्दार्थ
नमः: नमस्कार; पुरस्तात्: सामने से; अथ: और; पृष्ठतः: पीछे से; ते: आपको; नमः: नमस्कार; अस्तु: हो; ते: आपको; सर्वतः: सब ओर से; एव: ही; सर्व: हे सर्व (सब कुछ); अनन्तवीर्य: अनंत पराक्रम वाले; अमितविक्रम: अपरिमित पराक्रम वाले; त्वम्: आप; सर्वम्: सब कुछ; समाप्नोषि: व्याप्त करते हैं; ततः: इसलिए; असि: हैं; सर्वः: सर्व (सब कुछ)।
हिंदी अनुवाद
आपको सामने से नमस्कार, पीछे से नमस्कार, हे सर्व, आपको सब ओर से नमस्कार है। हे अनन्तवीर्य, हे अमितविक्रम, आप सब कुछ व्याप्त करते हैं, इसलिए आप ही सर्व कुछ हैं।
English Translation
Salutations to You from the front and from behind; salutations to You from all sides, O All! O You of infinite power and immeasurable prowess, You pervade everything, and hence You are everything.
टीका / Commentary
अर्जुन भगवान् को सर्वव्यापी मानते हैं।